
प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा के बेटे अश्विनी, भाई अजय व अभय और ममेरे भाई दीपक बाजपेयी हत्या के एक मामले में उलझ चुके हैं लेकिन उन्हें उबारने के लिए मंत्री के खास समर्थक कहे जाने वाले भिंड के मेहगांव के प्रभात किशोर उर्फ लला दुबे ने आरोप अपने सिर लेने की कोशिश की है। पुलिस ने उसके जुर्म कबूलने पर गिरफ्तारी भी कर ली है। मंत्री के परिजनों को बचाने का प्रयास कर रहे लला दुबे अब पुलिस के लिए खास मेहमान बन चुका है। पत्रिका ग्वालियर ने इस खास मेहमान की ऐसे तस्वीर प्रकाशित की है जिसमें पुलिस की आवभगत और मेहमान नवाजी उजागर हो रही है। थाने के कंप्यूटर कक्ष में वह कुर्सी पर आराम से बैठा है। बताया जाता है कि तस्वीर उतारने के पहले वह समाचार पत्रों को पढ़कर देश-दुनिया और अपनी खबर ले रहा था कि उसके बारे में कहां क्या छपा है। कैमरा देखते ही वह अलर्ट हो गया। हालांकि कैमरामैन ने उसकी तस्वीर न उतारने का नाटक किया मगर फिर भी वह सावधान रहा। इसके बाद कैमरामैन ने एक तस्वीर तो उतार ही ली। पुलिस थाने में पुलिस रिमांड वाले आरोपी के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है यह किसी से छुपा नहीं है। उसे जब परिजन खाने देने आते हैं तो पहले उसका टिफिन चैक किया जाता है और उसे तो सीखचों में रखा ही जाता है परिजनों को मिलने तक नहीं दिया जाता। तस्वीर साफ बताती है कि लला दुबे को पुलिस थाने में कैसा ट्रीटमेंट मिल रहा है। कंप्यूटर कक्ष में एक गैर पुलिस कर्मचारी भी मौजूद है जो कंप्यूटर पर काम कर रहा है। एक पुलिसकर्मी भी तस्वीर में दिख रहा है लेकिन उसके हाथ में न तो कागज है न कलम, जिससे यह लगे कि लला दुबे से कोई पूछताछ हो रही है। पुलिस के थाने में आए आरोपियों के साथ दो तरह के व्यवहार की यह एक और कहानी है। आखिर लला दुबे को क्यों यह ट्रीटमेंट दिया जा रहा है, इसके लिए जिम्मेदार कौन है, इसकी जांच आला अधिकारियों को करना चाहिए।
ऐसा ही होता है इस देश में तभी तो यह हाल है...
जवाब देंहटाएंमंत्री सैकड़ों लोगों को बेवकूफ बना रहा है। पुलिस भी उनके समर्थन में है तभी तो असली अपराधियों को नहीं पकड़ रही है। जिन सैकड़ों लोगों पर गोलाबारी हुई, पुलिस और नेताजी मिलकर उनकी आंखों और जुबान को झूठा साबित करने में लगे हैं। हद हो गई....
सही प्रश्न पूछा है आपने.
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