

भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा बोलती रहती थी लेकिन दो सरकारों का स्वाद चखने के बाद उसके कई नेताओं का दामन भी पाक साफ नहीं बचा है। इनमें से कुछ मंत्री बहुत ज्यादा आरोपों में घिर हैं। समय समय पर उन पर लगे आरोपों पर कार्रवाई के लिए दबाव बनता है लेकिन पार्टी आलाकमान से ये लोग कहीं न कहीं अपने आपको बचा लाते हैं। अब एक बार फिर कार्यसमिति की बैठक में कुछ इसी तरह का दबाव बना है। प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव अनंत कुमार ने दागी मंत्रियों को हटाए जाने की वकालत की तो राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इसे पार्टी का संदेश कहकर उक्त नेताओं के होश उड़ा दिए हैं। अब बारी पार्टी के इस संदेश पर अमल की है। संदेश पर अमल के लिए अब शायद सरकार वक्त मांगे और इस वक्त का दागी मंंत्री फिर कोई फायदा ले लें। कहीं अपने बचाव का रास्ता खोजकर पार्टी के अपने आकाओं के हाथ-पैर जोड़कर राष्ट्रीय अध्यक्ष पर दबाव बनाएं। यह तो वक्त बताएगा कि गडकरी के संदेशवाहक अनंत की बात पर किस मंत्री पर गाज गिरती है या सभी बेदाग साबित करने में सफल हो जाते हैं।
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