बुधवार, 14 जुलाई 2010

उमा भारती से खौफजदा नेता...


भाजपा में कई नेता इन दिनों भयभीत हैं। इन सब के डर का कारण केवल एक है वह उमा भारती की पार्टी में वापसी के समाचार। भाजपा और आरएसएस के कई दिग्गज उनकी वापसी को लेकर कई बार स्तर पर विचार विमर्श कर चुके हैं जिसके चलते साध्वी उमा भारती की वापसी का रास्ता काफी आसान हो गया है। साध्वी के आक्रामक मिजाज से उनके पुराने साथी भयाक्रांत हैं क्योंकि जब वे पार्टी से निकाली गईं थीं तब उनके बयानों में उमा भारती को निकलने के फैसले का न केवल समर्थन बल्कि उनके व्यवहार व उनके रवैये पर भी कई उल्टी-सीधी टिप्पणी की गईं थीं।भाजपा में सबसे ज्यादा दहशत में हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर, संस्कृति मंत्री लक्ष्मीनारायण शर्मा जैसे कमजोर नेता। गौर वे हैं जिन्होंने कुर्सी की खातिर मुख्यमंत्री पद पर पहुंचने के बाद भी एक केबिनेट मंत्री की कुर्सी को संभालने में संकोच नहीं किया। साथ ही जिन्होंने उम्र दराज होने के बाद भी विधानसभा के टिकट के लिए दिल्ली तक की दौड़ लगाई। यही नहीं बहु के लिए भी जिद कर टिकट लिया। लक्ष्मीकांत शर्मा हालांकि इस तरह के नहीं हैं लेकिन उन्होंने भी उमा भारती को पार्टी से निकाले जाने के बाद तीखे बयान दिए थे। इसी तरह आलोक शर्मा, विश्वास सारंग, शैलेंद्र शर्मा और कुछ अन्य नेताओं के बर्ताव में भी उमा भारती के पार्टी से निकालने जाने के बाद अचानक बदलाव आया था। रघुनंदन शर्मा, प्रहलाद पटेल, शैतानसिंह साथ तो गए थे मगर वे भी उन्हें मझधार में छोड़कर पार्टी में लौट आए थे। इनके अलावा पार्टी में कुछ ऐसे भी नेता हैं जो उमा भारती के पार्टी से जाने के बाद भी संपर्क में रहते थे। मगर इन दिनों उनके सितारे गर्दिश में हैं। उमा भारती की वापसी उनके लिए अच्छे दिन लाएगी, इस उम्मीद से वे अभी चुप्पी साधे हैं।

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