शनिवार, 3 जुलाई 2010
सच के आगे झुकी सरकार
आखिर मप्र सरकार ने अपने एक मंत्री की बलि देकर सच के सामने घुटने टेक दिए। स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा के इस्तीफे ने बेला गांव के गरीब परिवारों के दर्द को काफी हद तक राहत दी है लेकिन रसूखदारों के सितम के मारे ये ग्रामीण अभी-भी इसे पूरा न्याय नहीं मान रहे हैं। वे कह रहे हैं कि उन्हें तो तभी संतोष होगा जब सरकार आरोपियों की गिरफ्तारी कराएगी। प्रदेश के दागी मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रतलाम में कार्यसमिति की बैठक में दबाव बना था। इस दबाव के आगे दागी मंत्रियों में से एक अनूप मिश्रा ने घुटने टेक दिए लेकिन कैलाश विजयवर्गीय, जयंत मलैया, बाबूलाल गौर, विजय शाह जैसे मंत्री टस से मस नहीं हुए। उलटा विजय शाह ने तो ग्वालियर में यह तक कह दिया कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगा। आखिर ऐसे नेताओं से किस नैतिकता की अपेक्षा की जा सकती है। बेला गांव के दर्द के बहाने को हथियार बनाकर अनूप मिश्रा ने इस्तीफा दिया है। कांग्रेस और कुछ अन्य राजनीतिज्ञों को इसमें भी राजनीति की बू आ रही है। देखना यह है कि इस इस्तीफे के बाद प्रशासन और पुलिस बेला गांव हत्याकांड के आरोपियों की धरपकड़ में कितनी तेजी लाती है और उनके खिलाफ सबूत जुटाने में कैसी रणनीति अपनाती है।
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