
यह प्यार है या मानसिक विक्षिप्तता। किन्नर और पुरुष के बीच संबंध होना, प्रकृति के विरुद्ध है। ये रिश्ते ज्यादा समय तक नहीं चलते। मगर फिर लोग मानसिक विकृति की वजह से ऐसे कदम उठाते हैं और कुछ समय बाद वे प्रकृति से दो चार होते हैं तो फिर परेशान होते हैं।
खंडवा और इटारसी के ऐसे ही किन्नर और एक युवक की कहानी इन दिनों चर्चा में है। दोनों टे्रन में वसूली और धंधा कर अपना गुजर-बसर करते हैं। दोनों की मुलाकात वहां हुई और वे युवक को किन्नर ने अपने जाल में ऐसा फंसाया कि युवक उससे शादी तक को तैयार हो गया। गुरुवार को उसकी जिद्द के आगे माता-पिता की एक न चली और बाकायदा सात फेरे लेकर युवक ने किन्नर को दुल्हन के जोड़े के रूप में शादी रचा ली।
इस जोड़े की कहानी पता नहीं कितनी चले मगर ग्वालियर के ऐसे ही एक जोड़े की कहानी भी लोग इन दिनों याद कर रहे हैं। एक किन्नर के साथ युवक ने शादी तो कर ली मगर कुछ समय बाद दोनों के बीच ऐसे कटुता आई कि वे अलग हो गए। दोनों के बीच रोजाना झगड़े होते थे। किन्नर युवक पर अक्सर हावी रहता था तो परेशान होकर वह घर छोड़कर भाग गया। ऐसे ही कुछ और उदाहरण बताए जाते हैं जिनसे प्रकृति के खिलाफ जाकर विवाह रचने वाले लोगों की तनावग्रस्त लाइफ का पता चलता है। प्रकृति के विपरीत चलना बहुत कष्टप्रद होता है और ऐसे कदम बाद में पछतावे के अलावा कुछ नहीं देते।
रिश्तों की वाट लगाने में जब पूरा जगत और उसमें अब भारत के तथाकथित बुद्धिजीवी भी अपने पूरे बुद्धि-युद्धि कौशल से जुटे हैं ऐसे में आप और हमारी आवाज तो कहीं दबकर रह जाएगी या फिर दबा ही दी जाएगी। प्रकृति और नियम विरुद्ध (लड़का-लड़का और लड़की-लड़की या अन्य जिन पर लिखूंगा तो खाप पंचायत के पंचों की श्रेणी में गिन लिया जाउंगा सो उन्हें रहने दें) जितने भी प्रकार के रिश्ते हैं वे ज्यादा देर टिकते ही नहीं बल्कि वे बनते ही नहीं है। वे रिश्ते नहीं होते बल्कि मौज और अपनी विकृति को साकार करने का गंदा रास्ता होते हैं।
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