शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

तीन करते हैं जनता का प्रतिनिधित्व...

अपने हितों नेता हमेशा ध्यान रखते हैं फिर चाहे डीजल-पेट्रोल पंप लेने का मामला हो या दूसरी सरकारी एजेंसी या ठेके लेने-देने का। और तो और जब भी वेतन बढ़ाने की बात आती है तो ये उसे लेने में पीछे नहीं हटते। इनके हाथ में सारे फैसले लेने का अधिकार होता है तो फिर इनके प्रस्ताव पर कोई देरी नहीं होती। फटाफट निर्णय हुआ और अमल शुरू यानि चट मंगनी पट शादी। मगर ऐसे स्वहितों के परे हटकर काम करने वाले भी कुछ नेता होते हैं मगर उनका प्रतिशत नगण्य होता है। वास्तव में ये लोग ही जनता के सही प्रतिनिधि होते हैं।
ऐसा ही एक अजूबा असम विधानसभा में देखने को मिला। असम विधानसभा में विधायकों ने अपने वेतन भत्तों में जिस तरह से 400 फीसदी बढ़ोतरी की है वह नेताओं की स्वहित नीति का सबसे बड़ा उदाहरण है। मगर सवा सौ विधायकों की विधानसभा में तीन ऐसे भी विधायक मिले हैं जिन्होंने 400 फीसदी वेतन वृद्धि का विरोध किया है।
समाज को ऐसे विधायकों का सम्मान करना चाहिए। समाचार पत्रों को भी ऐसे लोगों के नाम प्रकाशित करने थे क्योंकि ये वास्तव में जनता की आवाज उठाने का काम कर रहे हैं। कुछ अखबारों ने इनकी संख्या तो दी है मगर नाम किसी ने भी प्रकाशित नहीं किए। जनता को कम से कम इनके नाम पता चल सकें यह तो समाचार पत्रों को करना ही चाहिए।

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