रविवार, 25 जुलाई 2010

बहनों के भैया, लड़कियों के मामा...कुछ करो

ग्वालियर शहर में इन दिनों अपराधियों और असामाजिक तत्वों का बोलबाला है। लुटेरे-चोर जहां वारदातें कर समाज में लगातार अपना आतंक फैलाने में कामयाब हो रहे हैं। वहीं समाज के तथाकथित दबंग सरेआम वारदातें कर अपने क्षेत्र में दबदबा बढ़ा रहे हैं। पुलिस के आला अफसरों के ठिकानों (दफ्तरों) और थाने-पुलिस चौकी के आसपास ही अपराधी और दबंग गोलियां चला रहे हैं तो अवैध कारोबार कर रहे हैं। हालत यह है कि चोर-उचक्के पुलिस अफसरों के घरों को भी नहीं छोड़ रहे।
अपराधियों और तथाकथित दबंगों के खिलाफ पुलिस की सख्ती कहीं दिखाई नहीं देने से अब लोगों ने स्वयं अपराधियों से लोहा लेना शुरू कर दिया है। इसमें महिलाएं अब आगे हैं। यही नहीं पुलिस के प्रति लोगों का गुस्सा इतना है कि महिलाएं खुलेआम लाठियां उठाकर पुलिसकर्मियों को ही धमकाने लगी हैं। दबंगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का सिलसिला बेलागांव से शुरू हुआ है जिसमें एफआईआर में दर्ज नामों छोड़ पुलिस ने विवेचना के आधार पर दूसरे लोगों को जेल भेज दिया। यही नहीं गिरफ्तार डेढ़ दर्जन अपराधिक रिकार्ड वाले असामाजिक तत्व की थाने में खुलेआम मेहमान नवाजी की गई। फिर माधव नगर में जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यपाल सिंह सिकरवार के खिलाफ एक रेत ठेकेदार के घर गोलियां चलाने का मामला आया तो पुलिस अब तक उसे भी तलाश नहीं कर पाई।
दबंगों के पुलिस गिरफ्त में नहीं को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस कहीं न कहीं राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। इससे पुलिस का मनोबल कुछ गिरता नजर भी आ रहा है। इसके लिए आला अफसरों को प्रयास करने की जरूरत है। रात्रि गश्त के लिए पुलिस कप्तान को थानों को चेताना होगा। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी इस स्थिति की समीक्षा कर मनोबल बढ़ाने के लिए कोई संदेश भेजना चाहिए।

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