राज्यसभा में आंकड़ों के फेर में बीजेपी का दांव
राज्यसभा में आए दिन बीजेपी को मुसीबत का सामना करना पड़ता है जिससे वह रिक्त हो रही सीटों पर अपने कब्जे के लिए साम दाम दंड भेद के तरीके अपनाने का मौका नहीं चूकना चाहती। मध्यप्रदेश में आंकड़े पक्ष में नहीं होने के बाद भी बीजेपी ने कुछ इसी तरह की राजनीति का पासा फेंका है।
बीजेपी ने अपने अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर दो नेताओं अनिल माधव दवे और एमजे अकबर को उतारे हैं लेकिन पार्टी के प्रदेश महामंत्री विनोद गोटिया को पहले पीछे से नामांकन पत्र भराया। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उन्हें उतारा और अब पार्टी के नेता खुलकर बयान दे रहे हैं कि बीजेपी के विधायक भी उन्हें वोट देंगे। गोटिया दूसरी पार्टियों के विधायकों से वोट मांगने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर सकते हैं। उन पर पार्टी की ओर से कोई पाबंदी नहीं रहेगी।
आखिरकार राजनीति में सबकुछ जायज है, के जुमले से बीजेपी भी खुद को बचा नहीं सकी है। अपने फैसलों को राज्यसभा में कराने में असमर्थ साबित हो रही बीजेपी यह अच्छी तरह से समझ भी गई है।
राज्यसभा में आए दिन बीजेपी को मुसीबत का सामना करना पड़ता है जिससे वह रिक्त हो रही सीटों पर अपने कब्जे के लिए साम दाम दंड भेद के तरीके अपनाने का मौका नहीं चूकना चाहती। मध्यप्रदेश में आंकड़े पक्ष में नहीं होने के बाद भी बीजेपी ने कुछ इसी तरह की राजनीति का पासा फेंका है।
बीजेपी ने अपने अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर दो नेताओं अनिल माधव दवे और एमजे अकबर को उतारे हैं लेकिन पार्टी के प्रदेश महामंत्री विनोद गोटिया को पहले पीछे से नामांकन पत्र भराया। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उन्हें उतारा और अब पार्टी के नेता खुलकर बयान दे रहे हैं कि बीजेपी के विधायक भी उन्हें वोट देंगे। गोटिया दूसरी पार्टियों के विधायकों से वोट मांगने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर सकते हैं। उन पर पार्टी की ओर से कोई पाबंदी नहीं रहेगी।
आखिरकार राजनीति में सबकुछ जायज है, के जुमले से बीजेपी भी खुद को बचा नहीं सकी है। अपने फैसलों को राज्यसभा में कराने में असमर्थ साबित हो रही बीजेपी यह अच्छी तरह से समझ भी गई है।