मंगलवार, 6 जुलाई 2010

इच्छा शक्ति से संभव है विकास

शहर को भोपाल या जयपुर की तर्ज पर सौंदर्यीकरण करने की योजना सुनने और उस पर अमल होने के बाद देखने में तो बहुत अच्छी लगती है लेकिन पहले शहर में पानी, बिजली, अतिक्रमण और यातायात के बढ़ते दबाव से जूझ रहे लोगों की परेशानियों को हल करने के लिए भी नेताओं और अफसरों को सोचना चाहिए। भोपाल और जयपुर में नेताओं और नौकरशाहों की दृढ़ इच्छाशक्ति से आज इन समस्याओं को काफी हद तक काबू में रखा गया है।
भोपाल के नए शहर में तीनों लिंक रोड सहित वीआईपी रोड, वन विहार रोड, जेल रोड, वल्लभ भवन रोड, ठंडी सड़क जैसी लंबी सड़कें नगर की शान मानी जाती हैं। वहीं जयपुर की एमआई रोड, भवानी सिंह रोड का जवाब नही लेकिन वहां की विरासत हवामहल, जल महल और सुव्यवस्थित तरीके का चांद पोल बाजार नगर के लिए गौरव है। इनकी तुलना में ग्वालियर की सड़कों को देखें तो दोनों नगरों की तुलना में कोई भी नहीं है। इसी तरह मान महल, गूजरी महल, जयविलास पैलेस, महाराज बाड़ा मौजूद हैं जिनको देखने के बाद लगता नहीं कि किसी ने कभी इनकी चिंता की है। अब सांसद यशोधरा राजे सिंधिया और अफसर इनकी चिंता कर रही हैं, यह अच्छी पहल है।
ग्वालियर शहर की समस्या कुछ हद तक भोपाल-जयपुर से मिलती जुलती है। जैसे भोपाल में सीहोर, विदिशा, होशंगाबाद, रायसेन और दूसरे प्रदेशों तथा जयपुर में सवाईमाधौपुर, टोंक, दौसा, करौली जैसे जिलों से लोग रोजगार की तलाश में आए व बस गए। ठीक उसी तरह ग्वालियर में भिंड-मुरैना, दतिया, झांसी, आगरा आदि से लोग नौकरी-धंधे के लिए आकर बसते जा रहे हैं। भोपाल और जयपुर में बाहरी जनसंख्या के कारण आज सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ गया है मगर नेताओं और अफसरों ने समय-समय पर दृढ़ इच्छाशक्ति जताते हुए अतिक्रमण को हटाया। आबादी की औसत वृद्धि के हिसाब से भोपाल-जयपुर में पानी की जरूरत का अंदाज लगाकर इंतजाम किए गए मगर बाहरी आबादी के तेजी से आने की वजह से आज दोनों शहर पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। फिर भी वहां इसको लेकर चिंता होने से भविष्य की योजना बनाई जा रही है। भोपाल में 20 साल आगे का सोचकर नर्मदा नदी का जल लाया जा रहा है तो जयपुर में रामगढ़ बांध से पानी नहीं मिल पाने पर बीसलपुर बांध से पानी लिया जा रहा है। ट्यूबवेल से भी पानी के इंतजाम किए जा रहे हैं। सड़कों के चौड़ीकरण के लिए भोपाल में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत काम किया जा रहा है।
भोपाल और जयपुर की तरह ग्वालियर शहर के विकास का सपना दिखाने वाले नेता और प्रशासन को यह अवश्य सोचना चाहिए कि दोनों राज्य की राजधानियां जिन समस्याओं से जूझ रही हैं उन्हें भी ध्यान में रखे। ग्वालियर की स्थितियां दोनों शहरों से कुछ अलग हैं। भोपाल व जयपुर में बिजली चोरी ग्वालियर की तुलना बहुत कम है। भोपाल-जयपुर में भी कुछ इलाकों में पानी के लिए टैंकर की मदद ली जाती है लेकिन इसके लिए लोगों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। दोनों शहर के स्थानीय नेता भी अतिक्रमण के खिलाफ शासन-प्रशासन को सहयोग करते हैं वहीं बिजली चोरी रोकने में भी स्थानीय नागरिक-बिजली कंपनी के अफसर सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। सभी को पानी मिलेगा इस बारे में दूरगामी योजना बनाने के लिए सोचा जाता है। यह जरूरी है कि भोपाल-जयपुर की तरह विकास की योजना बनाते समय ग्वालियर के लोगों को पानी, बिजली, अतिक्रमण, बढ़ते यातायात की समस्या से निजात दिलाने के लिए भी सोचा जाए।

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