बुधवार, 30 जून 2010

शेर की मांद में पहुंचकर किसी की आवाज निकली है...



गैस कांड का फैसला आने के बाद राज्य हो या केंद्र सरकार सभी ने बड़ी-बड़ी बातें कीं। केंद्र सरकार ने मंत्री समूह बनाकर गैस पीडि़तों के मुआवजा आदि को लेकर बहुत बयानबाजी और बैठकें भी हुई ं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तो मंत्री समूह को अपनी तरफ से अंतिम तारीख भी दी थी। इसके बाद यहां तक आया कि तीन श्रेणी में गैस पीडि़तों को मुआवजा दिया जाएगा।
मगर यह सब दिखावा ही लगता है क्योंकि पीएम मनमोहन सिंह की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात करते हुए तस्वीरें छपीं। खबरें भी प्रकाशित हुईं। इनमें कहीं भी पढऩे में नहीं आया कि श्री सिंह ने ओबामा के सामने गैस शब्द तक का जिक्र किया हो। फिर एंडरसन के नाम लेना तो दूर की बात है। हमारे प्रधानमंत्री की आवाज इस मुद्दे पर वहां तो नहीं निकली लेकिन जैसे उनके सामने हटे तो विमान में उड़ते समय फिर बातें (हवाई) कींं कि वारेन एडंरसन के प्रत्यपर्ण के मामले में अमेरिका और अनुकूल रवैया अपनाए। वाह! यह है तीसरी दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाले और दुनिया के लिए सबसे बड़े बाजार भारत के प्रधानमंत्री की दृढ़ताभरी आवाज। ऐसे में गैस पीडि़तों को क्या न्याय मिलेगा यह वे (गैस पीडि़त) खुद तय कर सकते हैं।

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