बुधवार, 21 जुलाई 2010

जब सपोर्ट तो कार्रवाई क्यों नहीं...

भारतीय जनता पार्टी अपने दोहरे चरित्र को लेकर गाहे ब गाहे सामने ले आती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भूमाफियाओं के प्रदेश में दबदबे को लेकर दिए गए बयान से आए राजनीतिक भूचाल पर पार्टी हाईकमान ने मुंह तो खोला लेकिन केवल चौहान के बयान को सही बताने के लिए। उन्होंने अपने बयान में चौहान की हिम्मत यह कह कर नहीं बढ़ाई कि वे भूमाफिया के खिलाफ सख्त फैसला लेकर कार्रवाई करें। अगर हाईकमान वाकई में कोई एक्शन लेने की बात कहता तो शायद पार्टी की जनता में एक स्वच्छ छवि बनकर जाती।
मुख्यमंत्री के भूमाफिया के पैसे एकत्रित कर उन्हें हटाने की साजिश रचने के शिवपुरी में दिए गए बयान से आए भूचाल का असर विधानसभा में दिखाई देने लगा है। इस कारण दो दिन से मप्र विधानसभा चल नहीं पा रही। कांग्रेस लगातार इस बयान पर बहस के लिए अड़ी है तो सत्तारूढ़ दल के विधायक इस पर राजी नहीं है। उलटा उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी पर कांग्रेस की टिप्पणी को लेकर वे विपक्ष को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच दिल्ली में भाजपा के राजीव प्रताप रूढ़ी ने शिवराज सिंह चौहान को यह कहकर हरी झंडी दे दी कि उन्होंने राज्य हित को ध्यान में रखकर बयान दिया था। उसका मतलब कांग्रेस ने राजनीतिक निकालते हुए बवाल मचा दिया है। चौहान की टिप्पणी राज्य हित में बिलकुल सही थी। अब इससे गुरुवार को और राजनीतिक बयानबाजी गरमाने के आसार हैं। साथ ही विधानसभा की कार्रवाई भी फिलहाल शुरू होने के हालात दिखाई नहीं दे रहे हैं।
एक-एक मिनट का हजारों रुपया का हिसाब कौन देगा.....
कांग्रेस और भाजपा के इस कृत्य से विधानसभा के हजारों रुपए के एक-एक मिनट के बेकार जाने से जनता के पैसे की बरबादी होगी। मगर अब इसकी चिंता किसी को क्यों होगी? उन्हें तो रोज के हिसाब से वेतन मिलेगा और जब वे चाहेंगे तब उसे सदन में बढऩे का फैसला करा लेंगे। साथ ही सदन के बाहर उनके काम भी होते रहेंगे। विधानसभा की कार्रवाई मेंं जनसमस्या के निराकरण संबंधी मुद्दों या विकास संबंधी किसी विषय पर सार्थक चर्चा व उसके लिए राशि स्वीकृत करने की उन्हें क्यों चिंता होगी।

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