राजनीति में महिला पंच हो या सरपंच या पार्षद या फिर विधायक, अधिकांश के पति उनकी तरफ से सक्रिय रहते हैं। गाहे ब गाहे पुरुष नेता इन महिला जनप्रतिनिधियों के पतियों के दैनदिनी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करते और फिर अंतर्विरोध शुरू हो जाते हैं। मगर पार्टी नेता विवाद को समय समय पर शांत करते रहे हैं। इस बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने शांत करने के बजाय इसमें घी डालने का काम किया है।
ग्वालियर में लंबे समय से चल रहे पार्षद पति विवाद को लेकर कई स्तर पर चर्चा हुई। पहले महापौर ने मनाने की कोशिश की, फिर भाजपा जिला मंत्री ने भोज पर बुलाकर सामंजस्य बैठाने के प्रयास किए। ये प्रयास बेकार साबित हुए और विवाद का निराकरण नहीं हुआ। इसी बीच संगठन के प्रदेश प्रमुख और सांसद प्रभात झा ने जिला स्तर की एक बैठक की। इसमें पार्षद पतियों को साफ तौर पर अपनी पार्षद पत्नियों से दूर रहने को कहा। उन्हें स्वतंत्र होकर राजनीति करने की हिदायत दी। उनके इस बयान से पार्षद पतियों में और ज्यादा गुस्सा है। कुछ का कहना है कि हमने अपनी दम पर पत्नियों को जिताया है। फिर हम उनकी राजनीति से दूर करने का अधिकार किसी को नहीं है। जनता को हमें जवाब देना है। देखना यह है कि इस राजनीति बयान से पार्षद पतियों, उनकी पत्नियों के बीच दूरी बढ़ती है या महापौर से उनके रिश्तेदार मधुर बनते हैं। मगर पार्टी के प्रदेश प्रमुख का यह बयान महापौर, पार्षद पति- पत्नी विवाद को शांत करने के स्थान पर बढ़ाने में ज्यादा भूमिका निभाएगा, यह संकेत मिल रहे हैं।

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