
खून के रिश्ते के लिए आमजन तो मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं लेकिन राजनीति में यदाकदा ही उदाहरण सामने आते हैं। इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह के समर्थन में भाजपा नेता लक्ष्मण सिंह की खुल्लम खुल्ला बयानबाजी ने खून के रिश्ते का महत्व फिर जता दिया है। लक्ष्मण सिंह ने कुछ साल पहले कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा को ज्वाइन किया था और सांसद भी बने थे लेकिन उन्होंने कभी भी अपने भाई के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं की।
भाई के रिश्ते को हमेशा सम्मानजनक स्थान देते रहे। जबकि उनके बारे में यह कहा जाता रहा है कि वे जो मुंह में आता है बोल देते हैं। कांग्रेस से भाजपा में जाने के बाद भी उनकी जुबान भाई के विरुद्ध गलत बयानी में नहीं खुली जिससे उनके विरोधियों को करारा तमाचा लगा। अब भाजपा अध्यक्ष गड़करी के दिग्विजयसिंह के खिलाफ स्तरहीन (जैसे बयानबाजी आजकल आमतौर से सभी नेता करने लगे हैं) किए जाने पर उनके विरुद्ध ही बयानबाजी कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि खून का रिश्ता उनके लिए सबसे ऊपर है। इसका खामियाजा उन्हें पार्टी से निष्कासन के रूप मेें भोगना पड़ा है। मगर इसके बाद भी वे भाई के खिलाफ पार्टी नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी के विरुद्ध बोलना बंद नहीं किया है। शनिवार को उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनौती देकर अपने भाई का बचाव किया। अब देखना यह है कि कहीं उनकी यह रणनीति कहीं भाजपा से निकलकर कांग्रेस में वापसी के लिए तो नहीं है। वैसे कुछ भी गडकरी के एक बयान से दोनों भाई नजदीक जरूर आए हैं।

चलिए नेटों की बयानबाजी से कुछ तो अच्छा हुआ.... दो भाई करीब आ गए...
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