असरदार लोगों से लोग कितने त्रस्त हो चुके हैं, इसका ताजा उदाहरण ग्वालियर के बेलागांव में देखने को मिलता है। भाई भीकम की हत्या के बाद उसका भाई परमाल और उसकी नवविवाहिता अपनी, अपने परिवार और गांव की सुरक्षा के लिए सरकारी बंदूक की चाह रख रहे हैं। सरकार से नौकरी मिलने का आश्वासन पाने वाले परमाल की इसके पीछे यह मंशा है कि वे सरकारी बंदूक वाली नौकरी से सुरक्षित महसूस करेंगे।
परमाल को गुरुवार को शासन-प्रशासन और पीडि़त पक्ष की समझौता वार्ता में सरकारी नौकरी के तौर पर संविदा शिक्षक बनाने का आश्वासन मंत्री नारायण सिंह कुशवाह व कलेक्टर ने दिया था। मगर उसका और उसकी पत्नी का मानना है कि कलम की नौकरी से वे न तो खुद की सुरक्षा कर पाएंगे और न परिवार व समाज की। सभी की सुरक्षा करने के लिए उन्हें बंदूक वाली नौकरी चाहिए। इसलिए उसने शासन और प्रशासन के सामने पुलिस में सिपाही बनाने की मांग रख दी है।
इस घटनाक्रम से शासन और प्रशासन को सबक लेना चाहिए कि भाई की हत्या के बाद इतना बवाल मचने और मंत्री का इस्तीफा होने तथा समाज के उसके समर्थन में खड़ा होने के बाद भी परमाल, उसका परिवार और गांव अभी-भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। इससे लगता है कि वे आज भी कितने खौफजदा हैं। इसलिए उनमें सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए शासन और प्रशासन को कुछ ऐसा प्रयास करना होगा जिससे गरीब असहाय में सुरक्षा का भाव पैदा हो और असरदार लोगों में एक संदेश जाए कि उनके किसी भी गलत काम को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
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