
राजनीति भले ही बुरी चीज हो लेकिन कई बार उसके फैसलों से लगता है कि राजनीति के दांव-पेंच में कई बार गरीब का भी अप्रत्यक्ष रूप से भला हो जाता है। इसका ताजा उदाहरण ग्वालियर के बेला गांव के गरीबों का है। बेला गांव के ग्रामीणों के रास्ते के मुद्दे में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा ने बाहुबल के सहारे गांव को खाली कराने का प्रयास किया लेकिन एक युवक की मौत ने उनका राजनीतिक जीवन बदल दिया। विरोधियों को ऐसा मौका हाथ लगा कि वे अनूप मिश्रा को कमजोर कर सरकार से बाहर करने में सफल हो गए। बेला गांव के भीकम की मौत ने अनूप मिश्रा के परिवार के सदस्यों को घेरे में ले लिया है। करीब दस दिन चले घटनाक्रम में विपक्ष ने कम और उनकी पार्टी के नेताओं ने मामले को ज्यादा तूल दिया। गांव में रोजाना पार्टी के नेताओं की आवाजाही रही और अखबारों में बयान भी की कि आपको न्याय मिलेगा। यह पार्टी नेताओं की कौन सी नीति थी। इसी तरह बंद के आयोजन को प्रशासन ने भी अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग दिया। बंद समर्थकों की धींगा-मस्ती को प्रशासन ने ऐसे नजरअंदाज किया जैसे की सत्ताधारी दल की ओर से बंद का आयोजन किया जा रहा हो। अनूप मिश्रा के बारे में कहा जाता है कि जिला प्रशासन में उनकी तूती बोलती है लेकिन पूरे घटनाक्रम में प्रशासन ने चुप्पी साधने के स्थान पर लीज प्रशासनिक जांच रिपोर्ट तैयार कराने जैसे बयान दिए। कुछ भी हो राजनीति के अखाड़े में एक गरीब भीकम की आत्मा को जरूर शांति मिलेगी कि सरकार ने उसके (कथित) आरोपियों को सजा दिलाने के लिए दबाव बनाया। वैसे हत्या में कोई भी आरोपी हो लेकिन रास्ता बंद करने और गांव के लोगों को जमीन खाली करने के लिए दबाव बनाने में जरूर अनूप मिश्रा की भूमिका रही थी। अब प्रशासन को गांव वालों को न्याय दिलाना है कि उनके सालों पुराने कब्जे मिलें और गैर आबाद गांव में बदलकर ग्रामीणों के साथ ज्यादती करने वालों को सजा दे।
मप्र के एक दागी मंत्री (स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा) की तो कुर्सी गई बोस... इस छोटी जीत (क्योंकि जंग अभी बाकी है...) की जनता और उसके साथ खड़े समर्थकों को बधाई। ...ऐसे नेताओं की बड़ी टोली है इस देश में जो सभी राजनीतिक दलों में पाए जाते हैं।
जवाब देंहटाएंइन्हें अभी पार्टी ने मंत्री पद से बर्खास्त किया है.. आगामी चुनाव में वोटिंग मशीन का बटन जनता के हाथ होगा सो असली फैसला तब जनता को ही लेना है। हालांकि चुनाव बहुत दूर हैं तो बस अपनी जनता से अपील है कि वो अपने दर्द को भूले नहीं, जख्म को हरा रखे और अवसर आने पर पूर्वमंत्री को राजनीति से भी निकाल बाहर करे।
सर, कमेंट पोस्ट करते समय वर्ड वेरीफिकेशन ऑप्सन आता है, कृप्या उसे हटा दें तो कमेंट पोस्ट करने में आसानी रहेगी।
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