बुधवार, 30 जून 2010
सब जानते हैं मगर बोलते नहीं
प्रदेश सरकार के असरदार मंत्री अनूप मिश्रा इन दिनों भारी संकट के दौर से गुजर रहे हैं। वजह है उनके साथ चलने वाली वह भीड़ जो उन्हें सही राय देने बजाय उनकी ताकत का अहसास कराती रहती है। ग्वालियर शहर में हाल ही में हुई दो घटनाओं से उनके राजनीतिक जीवन पर दाग लगने की स्थिति बन गई है। हां यह जरूर है कि अभी भी उनके आसपास की भीड़ उन्हें उनकी ताकत के भ्रम में डालकर हकीकत से दो चार नहीं होने दे रही।ग्वालियर की शान और ऐतिहासिक इमारतों में से एक विक्टोरिया मार्केट की आग में स्वाहा हुई दुकानों के मालिकों के विस्थापन का मामला लें तो मंत्री एक दिन अचानक सिंधिया ट्रस्ट की जमीन गोरखी पर कब्जा दिलाने पहुंच गए। वहां जो हुआ कैमरों में कैद है। मंत्री के नजदीकी रिश्तेदार दीपक बाजपेयी ने सिंधिया ट्रस्ट के वकील अनिल मिश्रा को जिस अंदाज में गोरखी से भगाया वह किसी असामाजिक तत्व से कम नहीं था। इसी तरह उसी दिन मंत्री से जोर से आवाज में बात करने वाले एक टैक्सी चालक शहाबुद्दीन को मिश्रा समर्थकों ने जमकर धुना। दूसरा मामला शिक्षण संस्थान आईपीएस कॉलेज प्रबंधन द्वारा बेला गांव के करीब 35 परिवारों का रास्ता बंद उन्हें गांव खाली कराने का धमकाने का है। इस कॉलेज के बारे में कहा जाता है कि मंत्री मिश्रा का है। जब बेला गांव के लोगों ने विरोध किया तो मंत्री के रिश्तेदारों और कई गुंडों ने मिलकर गांव पर बंदूकों से हमला किया। इसमें एक युवक मारा गया। यह मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि अब राजधानी भोपाल तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है। इन दोनों मामलों से भाजपा सरकार के मंत्री अनूप मिश्रा के राजनीतिक जीवन पर दाग लगने की बातें सभी कह रहे हैं लेकिन खुलकर अभी-भी कोई बोलने को तैयार नहीं है। उनके बेटे अश्विनी, दो भाई अजय-अभय और ममेरे भाई दीपक बाजपेयी पर हत्या, हत्या का प्रयास और बलवे का प्रकरण दर्ज हो चुका है। मंत्री रहते उनकी सरकार के कार्यकाल में ही यह प्रकरण दर्ज होना उनके लिए सोचने की बात है क्योंकि बिना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इच्छा और पार्टी हाईकमान की सहमति के यह दर्ज हो नहीं सकता। देखना यह है कि इतना सब होने के बाद उनकी आंखें कब खुलेंगी। इसका शायद जनता को इंतजार है।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें