भ्रष्टाचार की जहां बात आती है, वहां भारत का हर व्यक्ति उसके खिलाफ हां में हां मिलाने लगता है। यहां हर व्यक्ति का मेरा मतलब है निम्न, मध्यम निम्न और मध्यम वर्ग का आदमी। यही वह है जिसे भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा मार सहना पड़ती है। जब वह थक हार जाता है तो पैसे देकर काम कराता है और यह पैसा उसकी काली कमाई का नहीं होता बल्कि गाढ़े पसीने की कमाई का होता है। काम के लिए वह यह पैसा दे तो देता है मगर इसके बदले उसे अपने घर, परिवार, बच्चों की इच्छाओं, जरूरतों के लिए कैसे जेब तंग करना पड़ती है वही जानता है। यही वजह है कि जब भी भ्रष्टाचार की बात आती है तो हर यह व्यक्ति पुरजोर आवाज उठाता है और इसकी बड़ी संख्या का ही हर राजनीतिक दल फायदा उठाता है।
इस हर व्यक्ति नेभ्रष्टाचार की लड़ाई शुरू करने वाले बाबा रामदेव को भी भरपूर साथ दिया। हालांकि इसमें बाबा के अनुयायी भी बहुत बड़ी संख्या में थे क्योंकि वे बाबा का अनुसरण करते हैं। वे उनकी हर बात मानते हैं। शायद यही वजह रही कि अनशन में उन्होंने बच्चों के साथ पहुंचने के पहले यह नहीं सोचा कि दिल्ली में अनशन के दौरान कोई हादसा हो गया तो क्या होगा। न ही बाबा ने इस दिशा में सोचा। दिल्ली में चार जून की रात जो हुआ, अब उसकी चारों तरफ निंदा हो रही है।
चार जून की रात भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर पुलिस कार्रवाई से सरकार ने अनशन करने बाबा रामदेव को भले ही दिल्ली से हटा दिया मगर आंदोलन को और बड़ा रूप दे दिया। आंदोलन बाबा के हाथ में नहीं रहा है। भाजपा ने इसके हाईजैक कर लिया है। बाबा अब केवल अपने अनुयायियों के साथ हुए अत्याचार की लड़ाई तक सिमट गए हैं। मगर भाजपा ने कालेधन के अपने सुप्त एजेंडे को जगाकर सरकार की ईंट से ईंट बजाने की तैयारी पूरी कर ली है।
जनता महंगाई की मार से दबे जा रही है, लोगों के पास रहने को छत नहीं है, पहनने को कपड़े नहीं है, खाने के लिए दो टाइम की रोटी नहीं है। राजनीतिज्ञों को राजनीति के सिवाय कुछ नहीं सूझता। देखना यह है कि भाजपा को जो यह मुद्दा मिला है उससे जनता का कितना भला होता है। क्योंकि कालेधन की वापसी फैसला करने वाले राजनेता क्या अपने उन साथियों को तैयार कर पाएंगे जिनकी यह संपत्त है।
इस हर व्यक्ति नेभ्रष्टाचार की लड़ाई शुरू करने वाले बाबा रामदेव को भी भरपूर साथ दिया। हालांकि इसमें बाबा के अनुयायी भी बहुत बड़ी संख्या में थे क्योंकि वे बाबा का अनुसरण करते हैं। वे उनकी हर बात मानते हैं। शायद यही वजह रही कि अनशन में उन्होंने बच्चों के साथ पहुंचने के पहले यह नहीं सोचा कि दिल्ली में अनशन के दौरान कोई हादसा हो गया तो क्या होगा। न ही बाबा ने इस दिशा में सोचा। दिल्ली में चार जून की रात जो हुआ, अब उसकी चारों तरफ निंदा हो रही है।
चार जून की रात भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर पुलिस कार्रवाई से सरकार ने अनशन करने बाबा रामदेव को भले ही दिल्ली से हटा दिया मगर आंदोलन को और बड़ा रूप दे दिया। आंदोलन बाबा के हाथ में नहीं रहा है। भाजपा ने इसके हाईजैक कर लिया है। बाबा अब केवल अपने अनुयायियों के साथ हुए अत्याचार की लड़ाई तक सिमट गए हैं। मगर भाजपा ने कालेधन के अपने सुप्त एजेंडे को जगाकर सरकार की ईंट से ईंट बजाने की तैयारी पूरी कर ली है।
जनता महंगाई की मार से दबे जा रही है, लोगों के पास रहने को छत नहीं है, पहनने को कपड़े नहीं है, खाने के लिए दो टाइम की रोटी नहीं है। राजनीतिज्ञों को राजनीति के सिवाय कुछ नहीं सूझता। देखना यह है कि भाजपा को जो यह मुद्दा मिला है उससे जनता का कितना भला होता है। क्योंकि कालेधन की वापसी फैसला करने वाले राजनेता क्या अपने उन साथियों को तैयार कर पाएंगे जिनकी यह संपत्त है।

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